तेरी जटा से बहती रहते है गंगा की धरा शंकरा हे मेरे शंकरा
तेरी जटा से बहती रहते है गंगा की धरा शंकरा हे मेरे शंकरातेरी जटा से बहती रहते है गंगा की धरा शंकरा हे मेरे शंकरा।। खाने को है कंद मूल पीने को भांग हैउड़ते रहते है बार बार बारी के तरंग है।। कानो में कुण्डल सुन्दर सोहे गले नाग की माला शंकरा हे मेरे शंकराकानो … Read more