पधारों शबरी के मेहमान शबरी के मेहमान पधारो
पधारों शबरी के मेहमान शबरी के मेहमान पधारो,बिना प्रेम दुर्योधन की ग्रह छोड़ चले पकवान,रूखे साग विदुर घर खायो प्रेम सहित सुख मान,पधारो शबरी के भगवान पधारों, शबरी के मेहमान,पधारों शबरी के मेहमान शबरी के मेहमान पधारो।। द्रुपद सुता की लाज बचाई मध्य सभा में आय,खींचत चीरा दुशासन हारा चूर कियो अभिमान,पधारो शबरी के भगवान … Read more