अवधू भजन भेद है न्यारा
अलख लखा लालच लगा कहत न आवै बैन,निज मन धसा सरूप में सदगुरू दीन्ही सैनउनमुन लगी आकाश में निसदिन रहे गलताल,तन मन की कुछ सुध नहीं जब पाया निर्बाण।। अवधू भजन भेद है न्यारा,कोई कोई जानेगा जाणन हारा,अवधू भजन भेद है न्यारा।। क्या गाये क्या लिखी बतलाये क्या भरमें संसारा,क्या संध्या तर्पण के कीन्हें जो … Read more