बैरी बंजारा यूँ बोले
बैरी बंजारा यूँ बोले Bairi Banjara Yun Bole आएंगे एक दिन लेने कोयम के उड़न खटोलेबैरी बंजारा यूँ बोले औरों का हित स्वार्थ खा गयासत्य की करके चोरी खुद अपने ही गले में बांधीदुष्कर्मों की डोरी तब तो आँख मूंद ली थीअब मूंड़ पकड़ कर रोलेबैरी बंजारा यूँ बोले तरज – मिलने की तुम कोशिश … Read more