चित्त के चोर कान्हा हाए माखन चोर कान्हा
मैं तो विनती कर कर हार गयीदीदार अभी तक नही होयाक्या सुनती थी तेरे द्वारे परइनकार अभी तक नही होया।। पापी पे इशारा रहमत कासरकार अभी तक नही होयाएक चाह थी तेरे मिलने कीमैने और तो कुच्छ भी मनगा नहीमैं सुनती थी तेरे द्वारे पेइनकार अभी तक नही होया।। चित्त के चोर कान्हा हाए माखन … Read more