गोविंद गोपाल शरण तेरी आए

गोविंद गोपाल शरण तेरी आएचरण कमाल मे शीश नवाए जब से तुम्हारी लगान लगी हैदर्शन की प्यासी अखियाँ जागी हैनिषिदीन तेरे ही गुणगान गये निर्बल हूँ मैं निर्मल हूँ मैंविपदा हरो प्रभु विनती करू मैंये वेदना मान की तुमको सुनाए मझधार मे है नैया मेरीपर करो प्रभु करो मत देरीजाएगी लाज अब तू ही बचाए … Read more