विनती सुनो हनुमान मेरी तो सागर में पड़ी नैया
विनती सुनो हनुमानमेरी तो सागर में पड़ी नैया।। बीच भंवर में नैया डोलेचलते जावे जो होले होले।। झुठा जगत जहांमेरी तो सागर में पड़ी नैया।। विनती सुनो हनुमानमेरी तो सागर में पड़ी नैया।। नैय्या बोले जय हनुमनाकिनारे का नहीं ठिकाना।। सुनलो कृपा निधानमेरी तो सागर में पड़ी नैया।। विनती सुनो हनुमानमेरी तो सागर में पड़ी … Read more