मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे अपनी तो पतंग उड़ गई रे
फासले मिटा दो आज सारे,हो गए जी आप तो हमारे,मन का पंछी डोल रहा,संग मेरे बोल रहा,मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे,अपनी तो पतंग उड़ गई रे।। जब से तेरा दर्श मिला,मन ये मेरा खिला खिला,और मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे,अपनी तो पतंग उड़ गई रे।।उड़ गई, उड़ गई, उड़ गई,अपनी तो पतंग उड़ … Read more