तेरे दर पे मेरे माधव ये शीश झुकाया है
तेरे दर पे मेरे माधव ये शीश झुकाया है,बाबा हार के आया हु मैं दर दर का सताया हु,तेरे दर पे मेरे माधव ये शीश झुकाया है।। चौकठ पे गया सबकी हर मंदिर भटका हु,आखिर तेरे तोरण पर अपना सिर रखता हु,सुनता हु तेरी रेहमत दिन रात बरस ती है,बाबा हार के आया हु मैं … Read more