छुप छुप रोते है कन्हियाँ जब मैया याद आती है
राज पाठ और ठाठ बाठ के बीच याद तड़पाती है,राज पाठ और ठाठ बाठ में गइयाँ याद आती है,छुप छुप रोते है कन्हियाँ जब मैया याद आती है।। दास दासियाँ हाथ बाँध कर खड़े हुए है समाने,लेकिन वो अंदन कहा जो था जलती छाव में,हो मीठी लोरी ओ मैया की रोज सुलाने आती है,छुप छुप … Read more