कान्हा से अब ना रह गयी कोई दूरी
कान्हा से अब ना रह गयी कोई दूरीअधजल गगरी आज हुए है पूरी रे।। नचू ओढ़ चुनर सिंदूरी रेबुझी प्यास जो मान बेचैन कीमोहे सुध ना रही दिन रैन की।। मोहे सुध ना रही दिन रैन कीबुझी प्यास जो मान बेचैन की।। तेरे प्रेम का रंग है न्यारा रेसारा जाग ही लगे अब प्यारा रे।। … Read more