तेरे सिवा माँ कहीं है ना ठिकाना
तेरे सिवा माँ कहीं है ना ठिकानातेरे सिवा माँ कहीं है ना ठिकाना।। दर दर भटका हू देखा ज़मानातेरे सिवा माँ कहीं है ना ठिकाना।। जाऊं तो जाऊं किस चौखट में जाऊंदुख अपने मान के मैं किस को सुनौउ।। बहुत रो चुका हू अब ना रुलानातेरे सिवा मा कहीं है ना ठिकाना।। मात भवानी मुझे … Read more