शादी चले रचना शंकर भूत बजाये थाल
शादी चले रचना शंकरभूत बजाये थालशोर हुआ हिम की नगरी मेंदुल्हा है कंगाली शादी चले रचना शंकरअंग भभूत लगायेभूत प्रेत सब मिलाजुलकर दूल्हा को सजय कोई ताली दे दे नचेकोई ढोल बजाये देख बराती अधभूत शिव कीमैना भई बहली शोर हुआ हिम की नगरीदुल्हा है कंगाली शिव की चली बारात आजीसब सोया मसानी जाएंगेवाघम्बर को … Read more