कैलाशी कशी के वासी ज्ञान निधान तुम्ही हो शंकर भगवन तुम्ही हो
कैलाशी कशी के वासी ज्ञान निधान तुम्ही होभूत भयंकर किंकर हो शंकर भगवन तुम्ही होकैलाशी कशी के वासी ज्ञान निधान तुम्ही हो।। किया साल कूट है जाता जूट उठ रही सर लहर गंगापावन पुनीत हे गुण अतीत है अतीत सोहे उपवीत भुजंगा।। कुण्डलों की झलक जल अनल तकहै धरण फलक पंच रंगाशोभा का धाम किया … Read more