कैलाशी कशी के वासी ज्ञान निधान तुम्ही हो शंकर भगवन तुम्ही हो

कैलाशी कशी के वासी ज्ञान निधान तुम्ही होभूत भयंकर किंकर हो शंकर भगवन तुम्ही होकैलाशी कशी के वासी ज्ञान निधान तुम्ही हो।। किया साल कूट है जाता जूट उठ रही सर लहर गंगापावन पुनीत हे गुण अतीत है अतीत सोहे उपवीत भुजंगा।। कुण्डलों की झलक जल अनल तकहै धरण फलक पंच रंगाशोभा का धाम किया … Read more

महादेव शंकर हैं जग से निराले

महादेव शंकर हैं जग से निराले,बड़े सीधे साधे बड़े भोले भालेमेरे मन के मदिर में रहते हैं शिव जी,यह मेरे नयन हैं उनही के शिवालय बनालो उन्हें अपने जीवन की आशा,सदा दूर तुमसे रहेगी निराश।बिना मांगे वरदान तुमको मिलेगा,समझते हैं वो तो हरेक की मन की भाषावो उनके हैं जो उनको अपना बनाले… जिधर देखो … Read more

पर्वतो पे रहने वाले ओ भोले

ऊँचे ऊँचे पर्वतो पे रहने वाले ओ भोलेतुमसे बड़ी है आस शिव शंकर भोले।। भोला है डमरू वाला नाम भी भोलातेरे ही आगे दुखो का दरवाजा खोला।। मेरे इन कष्टों को दूर अब तो करदो भोलेतुमसे बड़ी है आस शिव शंकर भोले।। ऊँचे ऊँचे पर्वतो पे रहने वाले ओ भोलेतुमसे बड़ी है आस शिव शंकर … Read more

मेरा भोला बैठा गंगा जी के घाट

मेरा भोला बैठा गंगा जी के घाट,तन पे बसम रमा बसम लगा हो बैठा बसम लगा,मेरा भोला बैठा गंगा जी के घाट।। मंद मंद मेरा भोला मुश्कावे,मस्त मलंग होके अपनी धुन रहा डमरू बजा,मेरा भोला बैठा गंगा जी के घाट।। बैठा माथे लेके चंदा उजियारा,हाथ में चिमटा भजा के जोगी रहा अलख जगा,मेरा भोला बैठा … Read more

जल भोले को चढ़ाना तुम

वरदान कोई मांगने से पहलेजल भोले को चढ़ाना तुममिट जाएगी विपदा तेरीध्यान शिव का लगाना तुम।। जल भरने को जब तुम जाओछल और कपाट को हटाओभोले शंकर तो है वरदानीजो चाहो वो वरदान पाऊं।। तुम्हें मुक्ति जो पाना हैभोले के द्वार आना तुममिट जाएगी विपदा तेरीध्यान शिव का लगाना तुमवरदान कोई मांगने से पहलेजल भोले … Read more

मेला आया सावन का भोले के दर चलो

मेला आया सावन का भोले के दर चलो Mela Aaya Sawan Ka Bhole Ke Dar Chalo मेला आया सावन काभोले के दर चलो हरकी पौड़ी मारके दुबकीकंवर कांधे धरलो मेला आया सावन काभोले के दर चलो हरि लाल नीली पीलीसज राही कवारीहो रही बम बम भोले ऋषिकेश हरिद्वार में डोलेकांवरियो के तोले मनसा चंडी नीलकंठदर्शन … Read more

कैलाश पे डमरु बजाया भोलेनाथ ने शंभूनाथ ने

कैलाश पे डमरु बजाया भोलेनाथ ने शंभूनाथ ने Kailash Pe Damru Bajaya Bhole Nath Ne कैलाश पे डमरु बजायाभोलेनाथ ने, शंभूनाथ नेदीवाना सबको बनायाभोलेनाथ ने, शंभूनाथ नेछम-छम है नाचे त्रिपुरारीपर्वत पे है रौनक है भारीजादू सा चलाया भोलेनाथ ने समा गई है सातों सरगमइस डमरु की धुन मेंमानो तो खुद मात शारदेआई शिव आगन में … Read more