गुरु बिन घोर अँधेरा संतो बिना दीपक मंदरियो सुनो

गुरु बिन घोर अँधेरा संतो ,बिना दीपक मंदरियो सुनो,अब नहीं वास्तु का वेरा हो जी, जब तक कन्या रेवे कवारी,नहीं पुरुष का वेरा जी,आठो पोहर आलस में खेले ,अब खेले खेल घनेरा हो जी, मिर्गे री नाभि बसे किस्तूरी ,नहीं मिर्गे को वेरा जी,रनी वनी में फिरे भटकतो,अब सूंघे घास घणेरा हो जी, जब तक … Read more