
रहि रहि के जिया घबराये सखी री मन मोहन ना आये
Rah Rah Ke Jiya Ghabraye Sakhi Re Man Mohan Na Aaye
रहि रहि के जिया घबराये सखी री मन मोहन ना आये
रहि रहि के जिया घबराये सखी री मन मोहन ना आये
मोहन ना आये मन मोहन ना आये॥
रहि रहि जिया घबराए, सखी री मनमोहन ना आए
भूल गए मोहे मथुरा में जाकर, कुब्जा के संग प्रीत लगा के
कौन उन्हें समझाए सखी री मनमोहन ना आए
रहि रहि के जिया घबराये सखी री मन मोहन ना आये ॥
कौन सी ऐसी भूल हमरी काहे भुलाये दिए बांके बिहारी
निष् दिन याद सताए सखी री मन मोहन ना आये
रहि रहि के जिया घबराये सखी री मन मोहन ना आये ॥
उधो ज्ञान सिखावन आये मन मोहन की पाती लाये
लिख लिख ज्योत पठाये सखी री मन मोहन ना आये ॥
मोहन ना आये मन मोहन ना आये
रहि रहि के जिया घबराये सखी री मन मोहन ना आये
सखी री मन मोहन ना आये सखी री मन मोहन ना आये॥
सिंगर : मनीष मानस जी
Rah Rah Ke Jiya Ghabraye Sakhi Re Man Mohan Na Aaye – New Krishna Bhajan