ऐसी गुराँ ने पिलाई मैनु होश न रही
दोनों कर को जोड़ कर मस्तक घुटने तकतुझको हो प्रणाम मम शत शत कोटि अनेक।। कुमति कूप में पतन था पकड़ निकला अपनेधाम बताया ईश का देकर पूरा साथ।। पहले ये मन पाग था करता जीवन घातअब तो मन हंसा भया मोती चुन चुन खात।। ऐसी गुराँ ने पिलाई मैनु होश न रही जीकोई होश … Read more