बाँसुरी बजाए आज रंग से मुरारी
बाँसुरी बजाए आज रंग से मुरारी,शिव समाधि भूल गये, ऋषि मुनि की नारी,वेद पढ़त ब्रह्मा भूले, भूले ब्रम्हचारी,बाँसुरी बजाए आज रंग से मुरारी।। रंभा सम ताल चूकी, भूली नृत्यकारी,हो जमुना जल उलटी गयो, शोभा आज भारी,बाँसुरी बजाए आज रंग से मुरारी।। वृंदावन बंसी बाजी, तीन लोक प्यारी,ग्वाल बाल मगन भए, ब्रज की सब नारी,बाँसुरी बजाए … Read more