हे नाथ अब तो ऐसी दया हो जीवन निरर्थक जाने न पाए
हे नाथ अब तो ऐसी दया होजीवन निरर्थक जाने न पाए ये मन ना जाने क्या क्या करायेकुछ बन ना पाए मेरे बनायेकुछ बन ना पाए मेरे बनाये हे नाथ अब तो ऐसी दया होजीवन निरर्थक जाने न पाए ऐसा जगा दो फिर सो ना जाऊँअपने को निष्काम प्रेमी बनाऊँ तुमको ही चाहु तुमको ही … Read more