कब मिलहे घनश्याम श्याम मुख मोड़ गये सज में
कब मिलहे घनश्याम श्याम मुख मोड़ गये सज में,सुना गोकुल धाम कुञ्ज वन छोड़ गये सच में,कब मिलहे घनश्याम श्याम मुख मोड़ गये सज में।। हम न हुये हये मोर की पखियाँ हरि करते शृंगार,मुकट पर सज लेते सजनी,कब मिलहे घनश्याम श्याम मुख मोड़ गये सज में।। हम न हुये हये बांस की बंसी हरि … Read more