ओ मइयां जी किरपा करो मेरे अवगुण चित न धरो
ओ मइयां जी किरपा करो मेरे अवगुण चित न धरो,ओ मइया जी विनती सुनो मेरी विपदाये दूर करो,हाथो में पतवार धरो बीच भवर से पार करो,ओ मइयां जी किरपा करो मेरे अवगुण चित न धरो।। इक तेरा ही आसार है तू करदे एक इशारा,जो तू चाहे पलट जाये समय की बहती धारा,उल्जी लड़ियाँ खोल दे … Read more