माँ काली चालीसा -जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार
।। दोहा।।जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार ।महिष मर्दिनी कालिका , देहु अभय अपार ॥ ।। चौपाई।।रि मद मान मिटावन हारी । मुण्डमाल गल सोहत प्यारी ॥अष्टभुजी सुखदायक माता । दुष्टदलन जग में विख्याता ॥भाल विशाल मुकुट छवि छाजै । कर में शीश शत्रु का साजै ॥दूजे हाथ लिए मधु प्याला । हाथ तीसरे सोहत भाला … Read more