आज तेरी काया दुर्बल हो गई जिंदगी का बोझ ढोते ढोते
आज तेरी काया दुर्बल हो गई,जिंदगी का बोझ ढोते ढोते।। सुनो सुनाये तुम्हे कहानी,की बिता बचपन आई जवानी,माया में फसकर ये नहीं सोचा,है चार दिन की तेरी जिंदगानी,है चार दिन की तेरी जिंदगानी। नर देह पाई तूने जाग तू सोते सोते,आज तेरी काया दुर्बल हो गई,जिंदगी का बोझ ढोते ढोते।। चंद दिनों की है जिंदगानी,चंद … Read more