ठहरी नहीं ये उम्र भी ढलती चली गयी
ठहरी नहीं ये उम्र भी ढलती चली गयी,ठहरी नहीं ये उम्र भी ढलती चली गयी,आदत पुरानी लीक पे चलती चली गयी।। हम चाहते थे होवे हरी की उपासना,दिन रात मगर वासना छलती चली गयीठहरी नहीं ये उम्र भी ढलती चली गयी।। दुनिया में दिखा सब कुछ लेकिन मिला न कुछ,बेबस जवानी हाथ भी मलती चली … Read more