लक्ष्मण राजा राम मेरे घर में पधारे
शबरी बेचारी है प्रेम की मारी है,स्वागत में रघुवर के सुध बुध बिसारी है,लक्ष्मण राजा राम मेरे घर में पधारे।। कबसे बैठी मैं आस लगाये दो नयनन के दीप जलाये,रघुनंदन ने दरस दिखाए जन्म के सब सुख पाये,मेरी कुटिया के बड़े भाग सुहाने है,आज प्रभु को मीठे भोग लगाने है,थोड़ा करो विश्राम मेरे घर में … Read more