देख कर राम जी को जनक नंदिनी
देख कर राम जी को जनक नंदिनीबाग़ में बस खड़ी की खड़ी रह गईराम देखे सिया को सिया राम कोचारों अँखियाँ लड़ी की लड़ी रह गईदेख कर राम जी को……………… सब सखी देख कर यूँ कहने लगीरच दी है विधाता ने सुन्दर जोड़ीपर धनुष कैसे तोड़ेंगे कोमल कुंवरमन में शंका बनी की बनी रह गईदेख … Read more