क्या राज़ है मेरे साई सबसे छिपा रहे हो
तुम फ़कीर होकर भी बांटते खैरात होतुम नहीं फ़कीर साई सबके दीनानाथ होसाड़ी दुनिया से जुदा आपका अंदाज़ हैइस फकीरी में तुम्हारा कुछ न कुछ तो राज़ है खुद मांगते हो भिक्षा सबको खिला रहे होबिगड़ा हुआ मुकद्दर पल में बना रहे होक्या राज़ है मेरे साई सबसे छिपा रहे होमेरा पीर तू मेरा मौला … Read more