मन का आँगन महकने लगा है
मन का आँगन महकने लगा है,साथ गुरुवर का जबसे मिला है, रौशनी मन की बतला रही है,की अंधेरों ने कितना छला है, मन का आंगन महकने लगा है,साथ गुरुवर का जबसे मिला है है यहाँ तन के रिश्ते सभी से,माँ पिता बंधू भाई सभी से,माँ पिता बंधू भाई सभी से, आत्मा का है परमात्मा गुरु,जिससे … Read more