लाखों महिफिल जहां में यूँ तो
लाखों महिफिल जहां में यूँ तो,तेरी महफ़िल सी मेहिफिल नहीं है।। स्वर्ग सम्राट हो या हो चाकर,तेरे दर पे है दर्जा बराबर।तेरी हस्ती को हो जिसने जाना,कोई आलम में आखिर नहीं है।। दरबदर खा के ठोकर जो थक कर,आ गया गर कोई तेरे दर पर।तूने नज़रों से जो रस पिलाया,वो बताने के काबिल नहीं है।। … Read more