चली चली हो शिव की बारात चली रे
चली चली हो शिव की बारात चली रे,गौरा मैया से होने मुलाकात चली रे,हो चली चली……. भांग धतूरा देकर रगड़ा चले भुत की टोली,अंधे काढ़े लुड़े लंगड़े खेले भस्म की होली,भुत प्रेत भंग पीके नाचे होके झली रे, चली चली….हो चली चली रे शिव की बारात चली रे…… ना जाने भंडारी ने क्यों ऐसा भेस … Read more