वन जाने हते केकई काहे दोष लगाय रे
राम तुम्हारी महिमा को ये संसार ना जानेकेकई करण तजे चाहहे हमरो जिया नहीं माने।। करण कोई और नफरत जे करण तुम वन आएसच्ची सांची राम कहे केकई दोश लागे रे।। वन जाने हते केकई काहे दोष लगाय रेवन जाने हते केकई काहे दोष लगाय रे।। शबरी नाम की एक भीलानी राम भजन करती थीआएंगे … Read more