बाबा तुझे कोई कहे डमरुधारी
बाबा तुझे कोई कहे डमरुधारी,कोई त्रिपुरारी ऐ बाबा ।। कोई तुमसा न कोई दानी,नहीं दूजा कोई तुमसे सानी बाबा।। ये जग कैलाश पे कर के बसेरा,रामयी दियो धुनि ऐ बाबा।। जब तूने पिया विष का प्याला,तेरा रूप हुआ था निराला हे औघड़।। देव सब बन गए तेरे ही पुजारी,डमरू धरी ऐ बाबा।। तेरे दर पे … Read more