दुख कौन हरे बिन तेरे
दुख कौन हरे बिन तेरे,रघुबीर कृपालू मेरेजब से संसार में आया,ममता में रहा भुलाया,मद काम क्रोध सब घेरेरघुबर कृपालू मेरेदुख कौन हरे बिन तेरेरघुबर कृपालू मेरे।। हरि भजन न मो को भाया,नहिं प्रेम चरन रघुराया,अंत: में छाए अंधेरे ।रघुबीर कृपालू मेरे ।दुख कौन हरे बिन तेरेरघुबर कृपालू मेरे।। तन धोया मन नहिं धोया,यह जीवन व्यर्थ … Read more