संत रविदास अमृतवाणी दोहावली
हरि सा हीरा छांड कै, करै आन की आसते नर जमपुर जाएंगे, सत भाषै रविदास।। जा देखैै घिन ऊपजै, नरक कुण्ड में बास,प्रेम भक्ति से ऊद्धरै परगट जन रैदास।। ऐसा चाहूँ राज मैं जहाँ मिलै सबन को अन्न,छोट बड़ो सब सम बसै, रैदास रहै प्रसन्न।। पराधीनता पाप है, जान लेहु रे मीतरैदास दास पराधीन सौं, … Read more