यूँ ही नहीं ऐसे खाटू में दीनो का मेला लगता है
यूँ ही नहीं ऐसे खाटू में दीनो का मेला लगता हैजग छोड़े जिसे मेरा बाबा उसे पलकों पे बिठाये रखता है।। हर सवालों को मिलता जवाब अपनाआँख दर पे संजोती है ख्वाब अपनाशब्दों में श्याम वर्णन ब्यान क्या करूँइनकी करुणा तो है कल्पना से परेअंधकार को भी दर पे आके मिलती रौशनीहारों बेचारों पे हर … Read more