द्वारिका नाथ इतने दयालु दीन दुखियो को दिल से लगाते
द्वारिका नाथ इतने दयालु दीनदुखियो को दिल से लगाते,भगतो के दुःख को पल में मिटानेधरती पर जनम लेकर आते।। द्रोपदी जब यहा की बिलख ती,उसकी लजा भी जब दांव पर लगती,सच्चे मन से पुकारे लगातीवसतर देके है उसे बचाते,द्वारिका नाथ इतने दयालु दीनदुखियो को दिल से लगाते।। दुर्योध्न ने प्रभु को भुलाया मेवा मिष्ठान,स्वागत में … Read more