भोले तेरी भंगिया पिसुगी नहीं
भोले तेरी भंगिया पिसुगी नहींपिसुगी नहीं पिसुगी नहींदर्द करे है कलायी मेरी।। मिश्री मलयी क्यों रस नहीं आताभंगिया का स्वाद तेरे मन से ना जाता।। संग तेरे अब मैं रहूंगी नहीं रहूंगी नहींदर्द करे है कलायी मेरी।। भोले तेरी भंगिया पिसुगी नहींदर्द करे है कलायी मेरी।। कार्तिक गणेश को कौन सम्भालेभंगिया पीसन तेरे पड़गये छलेरोज … Read more