डम डम डमरू बजाये शिव शंकर कैलाशपति
डम डम डमरू बजायेशिव शंकर कैलाशपति डम डम डमरू बजायेशिव शंकर कैलाशपति नींद में सोया जीवा जगायेशिव शंकर कैलाशपति मठे उपहार तिलक चंद्रमाकहने नाग की माला डमरू की धुन पे नाचनचे सृष्टि का रखवाला सेवक तन के कस्त मितयेशिव शंकर कैलाशपति जटा जड़ से बहती गंगासबके पाप मिठाई धरती और प्यारे जीव किसमैया प्यास बुझाती … Read more