कुछ पाने के खातिर तेरे दर हम भी झोली फलाये हुए है
कुछ पाने के खातिर तेरे दर हम भी झोली फलाये हुए है Kuchh Paane Ke Khatir Tere Dar Hum Bhi Jholi Failaye Hue Hai कोई कह रहा की महल बनवाउंगा मैंऔर कोई कह रहा की शहंशाह बन जाउंगा मैं।। प्रति कोई ना जाने इस जीवन की क्या औकात हैचार दिन की चांदनी और फिर अंधेरी … Read more