क्या भरोसा है इस ज़िंदगी का
क्या भरोसा है इस ज़िंदगी कासाथ देती नहीं यह किसी का सांस रुक जाएगी चलते चलते,शमा बुज जाएगी जलते जलते ।दम निकल जायेगा रौशनी का ॥क्या भरोसा है… कोई कहता है माल खजाना है मेराकोई कहता है पुत्र परिवार है मेरामगर ये कोई नही कहताकि कब्र ठिकाना है मेरा हम रहे ना मोहोबत रहेगी,दास्ताँ अपनी … Read more