बड़ी आस लगी तुमसे तेरी और निहारूं मैं
बड़ी आस लगी तुमसे तेरी और निहारूं मैंदादी मेरी दादी दादी ही पुकारूँ मैंबड़ी आस लगी तुमसे तेरी और निहारूं मैं।। कितना कुछ कहना है ये सोच के आता हूँतुम्हे सामने पा कर के सब भूल ही जाता हूँमेरे आंसू समझती हो कैसे ये नकारु मैंदादी मेरी दादी दादी ही पुकारूँ मैंबड़ी आस लगी तुमसे … Read more