इस जीवन के तुम जीवन हो ब्रजचंद्रा तुम्हे कैसे समझाए
इस जीवन के तुम जीवन होब्रजचंद्रा तुम्हे कैसे समझाएदुखी होता बहुत तुम्हारे बिनाकैसे दिल अपना चिर दिखाए।। तेरे फूलो से भी प्यार तेरे कंतो से भी प्यारतू जो भी देना चाहे दे दे मेरे सरकार।। तेरी मर्ज़ी में विधाता कोई च्छूपा बड़ा राज़दुनिया चाहे हमसे रूठे तू ना होना नाराज़तुझे वंदन है बार बार हमको … Read more