द्वार मिला है मुझको ऐसा जैसे अंधे को ज्योति
द्वार मिला है मुझको ऐसाजैसे अंधे को ज्योतिछोड़ के अब मैं जौ कही नामाँ तो आख़िर माँ होतीद्वार मिला है मुझको ऐसा।। इश्स दर पे जो भी आ जाताबिन माँगे मिल जाता है।। दुख लेती सुख देती मैयाअजब तुम्हारा ख़ाता है।। करम के लेखे तुम ना देखोममता की यही रीति।। द्वार मिला है मुझको ऐसाजैसे … Read more