कान्हा तेरे रोज उल्हाने आवे रेे मन मोहन मुरली वाले
कान्हा तेरे रोज उल्हाने आवे रेे मन मोहन मुरली वाले,मन मोहन मुरली वाले मन मोहन मुरली वाले,कान्हा तेरे रोज उल्हाने आवे।। पहला उलाहना तेरा बागों में से आया,डाली झुकाई तूने फलो को चुराया,तू तो फलों का चोर कहाया रे मन मोहन मुरली वाले,कान्हा तेरे रोज उल्हाने आवे।। दूजा उलाहना तेरा जमुना में से आया,कपड़े चुराये … Read more