श्याम भजले घड़ी दो घड़ी
उल्झानो की ये सुलझे लड़ीश्याम भजले घड़ी दो घड़ी।। उल्झानो की ये सुलझे लड़ीश्याम भजले घड़ी दो घड़ी।। श्याम सुमनिरण का धन साथ देगाजग की माया क्या कब रूठ जाए।। एक पल का बरसा नहीं हैसास का तार कब टूट जाए जिंदगी मौत के डर खड़ी हैभजले श्याम घड़ी दो घड़ी उल्झानो की ये सुलझे … Read more