मुसाफिर यूँ क्यो भटके रे ले हरी को नाम काम तेरो कभी नही अटके रे
मुसाफिर यूँ क्यो भटके रे,मुसाफिर यूँ क्यो भटके रे,ले हरी को नाम काम तेरो कभी नही अटके रे,मुसाफिर यूँ क्यो भटके रे,मुसाफिर यूँ क्यो भटके रे।। कभी गरभ मे उल्टा लटके कभी चौरासी भटके,कभी गरभ मे उल्टा लटके कभी चौरासी भटके।। कभी वैतरणी मे गोता खावेकभी वैतरणी मे गोता खावेकभी भवर मे अटके रे।। मुसाफिर … Read more