क्या तन मंजता रे एक दिन माटी में मिल जाना
क्या तन मंजता रेएक दिन माटी में मिल जानापवन चले उड़ जाना रे पगलेसमय चुक पछताना चल जाना मिल गड़ी बनायीचड़ा कठ की डोल चारो तारफ से आग लगादफूक दया जस होरी क्या तन मंजता रेएक दिन माटी में मिल जाना हद जले जैसे बन की लकड़ियांकेश जले जस घासकंचन जैसी काया जल गायीकोई ना … Read more