मन की आखों से मै देखूँ रूप सदा सियाराम का
किस काम के यह हीरे मोती,जिस मे ना दिखे मेरे राम,राम नहीं तो मेरे लिए है,व्यर्थ स्वर्ग का धाम।। मन की आखों से मै देखूँ ,रूप सदा सियाराम काकभी ना सूना ना रहता,आसन मेरे मन के धाम का ।। राम चरण की धुल मिले,तो तर जाये संसारी,दो अक्षर के सुमिरन से ही,दूर हो विपता सारी।।धरती … Read more