गुरु बिन चैन कहा रे मनवा
गुरु बिन चैन कहा रे मनवाआँखिया प्यासी हरी दरश को बीते दिवस नैना ओ रे मनवाहरी बिन चैन कहा रे मनवा जाग की माया आजब निरालीइनके बंधन रेशम वालीडोर पकड़ मन गुरु चरण की हरी शरण अपनाले मनवा रे मनवाहरी बिन चैन कहा रे मनवा कल आज और कल के खेल मेंदिवस जानम है गवायाआज … Read more