मटकी दे ने छोड़ रे ग्वालन मटकी दे ने छोड़
मटकी दे ने छोड़ रे ग्वालन मटकी दे ने छोड़,पतली पतली तेरी कलहाइयाँ देंगे ग्वाला मोड़।। छुप छुपा के चतरू गुजरियाँ कंस के माखन खावे,कंस को वंस मिटा दूंगा मैं क्यों जयदा नखरावे,नकद धाम दे दू गा तुझको करले इसका तोड़,मटकी दे ने छोड़ रे ग्वालन मटकी दे ने छोड़।। कंस की नगर माखन लेकर … Read more